सुपौल। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BLSA) के तत्वावधान में, माननीय श्री राजेश कुमार बच्चन, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के निर्देशन में तथा श्री अमित गौरव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के पर्यवेक्षण में शनिवार को मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए विधिक सेवाएँ योजना, 2015 के अंतर्गत मंडल कारा, सुपौल एवं अनुमंडलीय कारा, वीरपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं मानसिक परामर्श शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों को मानसिक स्वास्थ्य, मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं मानसिक दिव्यांग व्यक्तियों के विधिक अधिकारों, निःशुल्क विधिक सहायता तथा उपलब्ध चिकित्सा एवं परामर्श सेवाओं के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित वक्ताओं एवं चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान, उचित उपचार एवं परामर्श की आवश्यकता तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं मानवीय व्यवहार अपनाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से प्रभावित व्यक्तियों को सम्मानजनक व्यवहार, आवश्यक उपचार तथा विधि के अनुसार निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने का अधिकार है।
इस अवसर पर मानसिक परामर्श शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर ध्यान देते हुए आवश्यक परामर्श एवं सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
इस कार्यक्रम में मुख्य विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता (Chief Legal Aid Defense Counsel) श्री संजय कुमार, सहायक विधिक सहायता प्रतिरक्षा अधिवक्ता श्री सौरभ मोहन ठाकुर, डॉ. अभिषेक कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (M.O.I.C.), सदर प्रखंड, सुपौल, डॉ. एम. के. मिलन, कारा चिकित्सक, श्रीमती नीलम सिंह एवं श्रीमती रिंकू कुमारी, ए.एन.एम., श्री प्रकाश कुमार, ड्रेसर, कारापाल श्री शंभू कुमार दास तथा कारा में कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा आयोजित यह पहल काराओं में निरुद्ध व्यक्तियों तक विधिक सहायता एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सेवाएँ पहुँचाने, उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा न्याय एवं मानवीय गरिमा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।


