चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल, लोकतंत्र बचाने के लिए 28 सितंबर को सुपौल में कलेक्ट्रेट घेराव: अनुपम

  • ज्ञानेश तो बस बदनाम है, मोदी असल बेईमान है: अनुपम
  • षडयंत्र के तहत जनता के वोट का अधिकार छीनना देशद्रोह है जो मोदी, शाह और ज्ञानेश ने किया है
  • चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करके पिछले तीन वर्षों के सभी चुनावों की स्वतंत्र जाँच हो: अनुपम

सुपौल। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सुपौल जिलाध्यक्ष अनुपम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अविलंब हटाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने जिस तरह का अक्षम्य अपराध किया है, उसके लिए उनको गिरफ्तार करके पिछले तीन वर्षों में हुए सभी चुनावों की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।

अनुपम ने कहा कि अगर दो दिन में ये मांग नहीं मानी जाती तो 28 सितंबर को सुपौल जिला कांग्रेस कमिटी द्वारा कलेक्ट्रेट का घेराव होगा। जननायक राहुल गाँधी के नेतृत्व में अब भारत के देशभक्त नागरिक लोकतंत्र के हत्यारों की जवाबदेही तय करेंगे।

अनुपम का ये बयान इंडियन एक्सप्रेस अखबार द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के संदर्भ में आया है। अखबार ने खुलासा किया है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार ज्ञानेश कुमार के फैसलों और नीतियों पर आपत्ति दर्ज करवाई थी। इसके बावजूद वोटर गहन पुनरीक्षण से लेकर फॉर्म 6 में अनाधिकृत बदलाव जैसे निर्णय आयोग लेता रहा। इस खबर के बाद देशभर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा असंतोष और आक्रोश है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने जो किया है, वो देशद्रोह है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुपम ने कहा कि देश आजाद हुआ तो हर भारतीय को वोट का अधिकार मिला था। संविधान में ऐसे प्रावधान बनाए गए कि ये अधिकार आपसे कोई छीन न सके, न कोई नेता, न कोई पार्टी और न सरकार। क्योंकि “वोट का अधिकार” सबसे बेसिक बात है लोकतंत्र के लिए। लेकिन साम, दाम, दंड, भेद से अपने विरोधियों को ठिकाने लगाकर आगे बढ़ने वाले नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी जब सत्ता में आई तो देश चलाने की नीतियों का भी अपराधीकरण कर दिया गया।

अनुपम ने बताया कि 2014 से पहले जिसे अपराध की श्रेणी में रखा जाता था, उसे कानूनी जामा पहनाकर नीति का रूप दे दिया गया, चाहे वो चुनावी चंदा हो, भगोड़े पूंजीपतियों की ऋणमाफी हो, राजनीतिक दलों की तोड़फोड़ या वोटर लिस्ट में हेराफेरी। शाह और शहंशाह ने अपराध को इस कदर शीर्ष राजनीति की मुख्यधारा का हिस्सा बना दिया कि वो अपराध जैसा दिखना ही बंद हो गया। ऊपर से इनके व्यापारी मित्रों द्वारा चलाई जा रही मीडिया ने ऐसा प्रचार किया कि इनके अपराध का विरोध करने वालों को ही देशद्रोही कहा जाने लगा।

लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट ने उस बात की पुष्टि कर दी जो नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी लगातार तीन साल से कह रहे थे। रिपोर्ट ने कागजों और तथ्यों के आधार पर साबित कर दिया कि भारत का चुनाव आयोग गैरकानूनी और असंवैधानिक ढंग से काम कर रहा है। खुद उन दो चुनाव आयुक्तों के हवाले से खबर छप गई जो आयोग में शीर्ष पर बैठकर निर्णय ले रहे थे।

सीधा आरोप मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर है जो अपने बाकी दो आयुक्त साथियों की चेतावनियों को नजरअंदाज करके आपके वोट के अधिकार पर हमला करने की कुनीति बना रहे थे। मीडिया रिपोर्ट ने बताया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई लेकिन ज्ञानेश बाबू अपने आका के सुविधानुसार SIR (वोटर गहन पुनरीक्षण) से लेकर Form 6 में अनाधिकृत बदलाव जैसे कई नियम लागू करते गए। नतीजा हुआ कि बिना पारदर्शिता जवाबदेही के देशभर में करोड़ों वोट काटकर और जोड़कर कई चुनावों के परिणामों को प्रभावित किया गया। ऐसा करके भाजपा के खिलाफ मतदाताओं में जो एंटी इनकंबेंसी का माहौल था, उसे खत्म किया गया और जनता के मूड से विपरीत जनादेश लाया गया।

इसी संदर्भ में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस वार्ता में कहा है कि किसी भी लोकतंत्र की सच्चाई होती है एंटी इनकंबेंसी, लेकिन सद्दाम हुसैन के इराक में या किम जोंग के नॉर्थ कोरिया में एंटी इनकंबेंसी नहीं होती। आज वही हाल भारत में बना दिया गया है जिसका सबसे प्रमुख हथियार है एक ऐसा चुनाव आयोग जो शाह और शहंशाह की कठपुतली है। ऐसी परिस्थिति बनाने के लिए पीएम मोदी ने पहले तो चुनाव आयुक्त की चयन प्रक्रिया को बदला, फिर कानून बनाकर आयुक्त को केस मुकदमे से बचाया और अंततः 45 दिनों में इलेक्शन से जुड़े डेटा सबूतों को नष्ट करने का नियम बना दिया। यही कारण है कि जब भी आरोप ज्ञानेश कुमार पर लगता है तो बचाव में मोदी अपने लोगों से प्रेस वार्ता करवाने लगते हैं।

अनुपम का स्पष्ट कहना है कि ज्ञानेश तो बस बदनाम है, पीएम मोदी असल बेईमान है। क्योंकि वही इनको लगातार नियंत्रित कर रहे थे। इन खुलासों के बाद चुनाव आयुक्त को एक पल भी अपनी कुर्सी पर बैठे रहने का अधिकार नहीं है। इनको जेल होनी चाहिए और पिछले तीन साल में हुए हर चुनाव की स्वतंत्र समीक्षा करके निरस्त किया जाना चाहिए।

राहुल गाँधी लगातार इसपर सवाल पूछ रहे थे, उन्होंने कई प्रेस वार्ता की और बिहार में तो पूरा ‘वोटर अधिकार यात्रा’ इसी एक मुद्दे पर कर डाला। लेकिन जवाब देने की बजाय ज्ञानेश कुमार धमकी देता था, गंभीर सवालों को उठाने की बजाय गोदी मीडिया इसे विपक्ष का बहाना बताता था और इसका स्वतः संज्ञान लेने की बजाय न्यायपालिका भी समय काटती रही।

अनुपम ने कहा कि इतिहास के पन्नों में ये सब दर्ज होगा कि इस अपराध का कैसा खामियाजा दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और इस देश की जनता ने भुगता। आज अगर हमारा देश महंगाई, बेरोजगारी, नशा और अपराध से तबाह है, तो उसका प्रमुख कारण यही है कि सत्ता में बैठी पार्टी को पता है कि वो वोट चोरी करके सरकार में बने रहेंगे। तभी तो मोदी और शाह जैसे लोग कभी दावा करते हैं कि उनको कोई हरा ही नहीं सकता तो कभी कहते हैं कि वो तीस साल तक सत्ता में बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अब समझना पड़ेगा कि ये मुद्दा अब पक्ष-विपक्ष, कांग्रेस-भाजपा से कहीं ज्यादा देश के लोकतंत्र को बचाने का हो गया है। शाह और शहंशाह की तानाशाही जोड़ी भारत से लोकतंत्र नष्ट कर रही है और राहुल गाँधी पूरी निडरता के साथ इस कठिन दौर में भारतीय लोकतंत्र के रक्षक की तरह खड़े हैं।

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