गयाजी जिले के वजीरगंज प्रखंड का हसरा गांव इन दिनों एक अनोखी वजह से सुर्खियों में है। गांव के एक प्राचीन गढ़ से करीब दो वर्ष पहले मिली भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा अब श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि यह प्रतिमा दिनभर में तीन बार अपना रंग बदलती है। इसी आस्था और रहस्य के कारण यहां दूर-दूर से श्रद्धालुओं का पहुंचना लगातार बढ़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले गांव के समीप स्थित एक पुराने गढ़ की खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की प्राचीन प्रतिमा मिली थी। प्रतिमा मिलने की सूचना पर पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी पहुंचे थे और प्रतिमा को अपने संरक्षण में लेने की बात कही थी। हालांकि, ग्रामीणों ने इसे गांव की धरोहर बताते हुए बाहर ले जाने का विरोध किया।
गांव वालों ने सर्वसम्मति से प्रतिमा को गांव में ही रखने का निर्णय लिया। इसके बाद देवी मंदिर के समीप भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया गया। तभी से यहां नियमित पूजा-अर्चना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिमा मिलने के बाद गांव में धार्मिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं और अब आसपास के जिलों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
हसरा गांव के लोगों का दावा है कि भगवान विष्णु की यह प्रतिमा दिनभर में तीन अलग-अलग रंगों में दिखाई देती है।
सुबह के समय प्रतिमा का रंग काला नजर आता है, दोपहर में हरा दिखाई देता है और शाम होते-होते इसका रंग धुंधला हो जाता है। इस अनोखे दावे ने श्रद्धालुओं की उत्सुकता और आस्था दोनों को बढ़ा दिया है। हालांकि, इस रंग परिवर्तन की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीण सियाराम प्रसाद, कामता यादव और अरुण कुमार ने बताया कि प्रतिमा पर प्राचीन लिपि में कुछ अंकित है, लेकिन उसका अर्थ अब तक समझ में नहीं आ सका है। उनका कहना है कि अधिकारियों ने प्रतिमा को ले जाने का प्रयास किया था, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि यह प्रतिमा गांव की धरोहर है और गांव में ही रहेगी। इसके बाद प्रतिमा को मंदिर में स्थापित कर नियमित पूजा शुरू कर दी गई।
अब यह प्राचीन प्रतिमा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि इतिहास और पुरातत्व के लिहाज से भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।
प्रतिमा के रंग बदलने के दावे और उस पर अंकित प्राचीन लिपि को लेकर लोगों में चर्चा लगातार बढ़ रही है।
