

वरदान न्यूज । सुपौल
ज्ञान भारतम् मिशन के प्रभावी क्रियानवायन हेतु सुपौल जिले में व्यापक प्रचार प्रसार तथा हस्तलिखित पांडुलिपियों के सूचीकरण, अपलोडिंग को लेकर जिला स्तरीय बैठक में श्री सावन कुमार, भा0 प्र0 से0 जिलाधिकारी, सुपौल द्वारा युद्ध स्तर पर पांडुलिपियों की खोज एवं उसका त्वरित सूचीकरण तथा ज्ञान भारतम् ऐप पर प्राप्त पांडुलिपि संबंधित तीन फोटो अपलोड करने के आवश्यक निर्देश दिए गए। बैठक में उप विकास आयुक्त, सुपौल (नोडल, ज्ञान भारतम् मिशन), अपर समाहर्ता, आपदा, DFO, अनुमंडल पदाधिकारी सदर सुपौल, Dpo education, निदेशक DRDA, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, प्रभारी पदाधिकारी अभिलेखागार, कार्यपालक पदाधिकारी नगरपरिषद सुपौल एवं जिला स्तरीय अन्य पदाधिकारी फिजिकली उपस्थित थे तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सभी अनुमंडल पदाधिकारी, सभी बीडीओ, अभी CO, सभी RO, सभी BEO, सभी प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी उपस्थित थे। उप विकास आयुक्त, सुपौल द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा कागज,भोजपत्र,
ताड़पत्र, कपड़े आदि में हस्तलिखित पांडुलिपियों के रूप में वर्तमान एवं भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल विरासत है। पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन तथा इसमें समाहित भारतीय ज्ञान परंपरा को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने हेतु भारत सरकार के फ्लैगशिप पहल के रूप में “@ज्ञान भारतम् मिशन” का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाना आवश्यक है। भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है, ताकि यह अमूल्य धरोहर शोध विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। यह पांडुलिपियों वर्तमान पीढ़ी को उपलब्ध कराने के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित रखा जा सके। मिशन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान के भंडार को संरक्षित करने, उनका संरक्षण एवं डिजिटलीकरण करते हुए उनमें निहित ज्ञान को अनुसंधान, अनुवाद एवं प्रकाशन के द्वारा विश्व पटल पर प्रस्तुत किया है जाना है। उल्लेखित किया गया कि बिहार एक संपन्न राज है, यहां के लोकगीत परंपराओं और पांडुलिपियों को अगले पीढ़ी तक बचाए रखने हेतु उनके संरक्षण एवं डिजिटाइजेशन अति आवश्यक है। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि अभी तक सुपौल जिला से 38 पांडुलिपियों की सूची सुपौल सदर अनुमंडल से प्राप्त है और उसे ज्ञान भारतम् ऐप पर अपलोडिंग के बाद ये 38 पांडुलिपियां संस्कृति मंत्रालय द्वारा वेरिफाइड भी किया जा चुका है। सुपौल की ज्ञान परंपरा विश्व पटल पर उजागर हो इसके लिए जिला मुख्यालय से लेकर ग्राम पंचायत के सभी सरकारी विभाग एवं गैरसरकारी संस्थाओं, स्कूल, कॉलेजेस, पुस्तकालय, मठ मंदिर, साहित्यकार, कवि, ज्योतिषाचार्य, पंजीकार, पांडुलिपि संग्राहक, लेखक, वरिष्ठ कलाकार, पत्रकार, पुराने घराने आदि लोगों से संपर्क किया जा रहा है।
