
वरदान न्यूज/मधेपुरा।
मधेपुरा जिले के उदाकिशुनगंज प्रखंड के अंतर्गत आने वाला नयानगर पंचायत इन दिनों अपनी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक समृद्धि को लेकर सुर्खियों में है। यहां स्थित मां भगवती का प्राचीन मंदिर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि दूर-दूर के जिलों और राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसे मनोकामनापूर्ण सिद्धि पीठ के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, इस ऐतिहासिक मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है। यहाँ स्थापित मां भगवती की काले पत्थरों की प्रतिमा बेहद अलौकिक और आप्रती मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा स्वयं भगवान विष्णु द्वारा की गई थी। मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्राचीन परंपरा के अनुसार, शुरुआती काल में इस क्षेत्र की व्यवस्था राजा राजदेव द्वारा संचालित होती थी। आज भी यहां पूजा-अर्चना का शुभारंभ दुहाई राजा रामदेव की कहकर ही किया जाता है, जो इस स्थल की ऐतिहासिकता और पुरानी परंपराओं को जीवित रखता है।नयानगर मंदिर की विशेषता यह है कि यहां माता भगवती सिंह पर सवार एक कमल आसन पर विराजमान हैं। मां की चार भुजाओं में से दो भुजाएं बाहर दिखाई देती हैं। माता के हाथों में कोई अस्त्र-शस्त्र नजर नहीं आता, इसलिए इन्हें अभय और वरदायी मुद्रा में पूजा जाता है। इसके अलावा, मंदिर परिसर में बलि देने की वर्षों पुरानी परंपरा भी चली आ रही है। क्षेत्र के लोगों का अटूट विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से नयानगर वाली मां भगवती के दरबार में आता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं होती। यहां विशेषकर शारदीय और वांतिक नवरात्र के दौरान भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। पर्व-त्योहारों के अवसर पर मंदिर कमेटियों द्वारा भव्य पंडालों का निर्माण और विशाल मेलों का आयोजन किया जाता है, जिससे पूरा इलाका भक्तिमय हो जाता है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस पौराणिक स्थल की ख्याति दिनों-दिन बढ़ रही है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि सरकार और पर्यटन विभाग इस ऐतिहासिक स्थल को आधिकारिक तौर पर पर्यटक स्थल घोषित कर दे, तो न केवल यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ेंगी, बल्कि मधेपुरा के पर्यटन मानचित्र पर नयानगर का यह मंदिर एक नए मील का पत्थर के रूप में उभरेगा।
