

वरदान न्यूज । पूर्णियां
श्री अंशुल कुमार (भा0प्र0से0) जिला पदाधिकारी के निर्देश के आलोक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी सुगंधा शर्मा के मार्गदर्शन में पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत प्रत्येक दिन माईक्रोप्लान के आधार पर सभी आँगनबाड़ी केन्द्रों पर विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। जिला प्रोग्राम पदाधिकारी द्वारा सभी गतिविधियों का सतत मानिटरिंग एवं समन्वय स्थापित करते हुए विशेष रूप से पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। निर्धारित माइक्रोप्लान के अंतर्गत दिनांक 18.04.2026 (शनिवार) को विशेष भी0 एच0 एस0 एन0 डी0 पोषण एवं वृद्धि निगरानी, बाल विकास में पुरूष अभिभावकों की भूमिका पर सत्र (पापा वाली बात), नो स्क्रीन ऑवर/फेमली प्ले टाईम अभियान, सामुदायिक कार्यक्रम एवं पोस्टर लगाना/ नारा लेखन (पोषण से संबंधित) गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सेविका, महिला पर्यवेक्षिका, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी द्वारा निर्धारित, आवंटित आँगनबाड़ी केन्द्रों पर लाभार्थियों एवं लक्षित वर्ग समूह के साथ उपरोक्त गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गयी।
पुरूष अभिभावकों की भूमिका पापा वाली बात पर विस्तृत चर्चा की गयी। पिता अपने बच्चें के प्रति गहरा प्रेम और स्नेह रखते हैं। वे अपने बच्चों की छोटी-छोटी जरूरतों का ध्यान रखते हैं और उनकी सुरक्षा की चिंता करते है और हर प्रकार का समर्थन देते हैं ।पिता के लिए बच्चा सबसे अनमोल है और वे उसकी खुशी में अपनी खुशी समझते हैं। माता पिता का प्रेम बच्चें के लिए एक मजबूत नींव बनाता है।जिस पर बच्चें अपने जीवन का निर्माण करते हैं। माता का आँचल स्नेह,ममता और आश्रय का प्रतीक होता है। बच्चें का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान मिलने वाले देखभाल और सही पोषण पर निर्भर करता है। नो स्क्रीन ऑवर/फेमली प्ले टाईम अभियान के द्वारा पूर्णिया जिले के सभी केन्द्रों के लाभार्थियों एवं लक्षित वर्ग के सभी सदस्यों को आवश्यक सुझाव दिया गया – स्कूल/आंगनबाड़ी के दिनों में बच्चों को 1.5 घंटे से अधिक स्क्रीन टाईम नहीं देना चाहिए। बेडरूम और डाईनिंग टेबल को नो स्क्रीन जोन बनाया जाना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों के बीच डाॅक्टर-मरीज, दुकानदार या शिक्षक-छात्रा बनकर अभिनय/नाट्य प्रस्तुति करना चाहिए जो बच्चों की कल्पनाशीलता को बढ़ाता है।
बच्चों के साथ मिलकर बिना आग के रेसिपी या कुकीज बनाना चाहिए। बच्चों के साथ सहयोगात्मक भाव से गमलों/बागवानी में पानी डालना या छोटे पौधे लगाना चाहिए। विशेष भी0एच0एस0एन0डी0 पोषण एवं वृद्धि निगरानी के तहत कुपोषण की स्क्रीनिंग कर गंभीर रूप से कुपोषित SAN और मध्यम कुपोषित MAM बच्चों की पहचान कर SAM बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र सह स्वास्थ्य केंद्र इलाज के लिए भेजने हेतु प्रेरित किया गया। पोषण ट्रेकर ऐप्लिकेशन का उपयोग करके वास्तविक समय (Real Time) में बच्चों की उपस्थिति और विकास डेटा को रिर्काड करवाया गया। उपर्युक्त सभी तरह के आयोजनों को सामुदायिक कार्यक्रम/डिजिटल सहभागिता एवं पोस्टर नारा लेखन के माध्यम से करवाया गया। जोकि लाथार्थियों एवं लक्षित वर्ग के सभी समुहों पर गहन जागरूकता फैलाया गया। पोषण पखवाड़ा का संदेश:- सही पोषण – देश रौशन।
