रक्तकाली चौंसठ योगिनी मंदिर : दीपावली पर होती है विशेष पूजा-अर्चना
- मां लक्ष्मी और मां रक्तकाली के दर्शन को पहुंचते हैं श्रद्धालु
- रंग-बिरंगी रोशनी से सजाए गए सभी मंदिर
वंदना झा/सहरसा।
दीपावली के अवसर पर शहर के प्रसिद्ध रक्तकाली चौंसठ योगिनी मंदिर में मां लक्ष्मी और मां रक्तकाली की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। दीपावली की संध्या लोग अपने घरों में दीप जलाकर पर्व मनाते हैं। वहीं, इस अवसर पर मत्स्यगंधा स्थित रक्तकाली मंदिर में भी पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है। मां लक्ष्मी और मां काली के दर्शन एवं पूजन के लिए शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। पर्व को लेकर परिसर के सभी मंदिरों को लाल, नीली, हरी और पीली रोशनी से सजाया गया है। हिंदू धर्मग्रंथों में धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी 14 रत्नों में एक के रूप में प्रकट हुई थीं। दीपावली की संध्या मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। वहीं, इस अवसर पर मां काली की आराधना की भी परंपरा रही है। इसी को लेकर रक्तकाली मंदिर में दीपावली के दिन विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिर की प्रमुख विशेषता मां रक्तकाली की छह गुणा छह फीट आकार की विशाल प्रतिमा है। इसे बिहार की पहली और देश की तीसरी प्रतिमा बताया जाता है। खास बात यह है कि मंदिर की स्थापना से पहले यह स्थल पोस्टमार्टम केंद्र था। बाद में यहां मंदिर की स्थापना हुई और धीरे-धीरे यह स्थान सहरसा के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया। मंदिर की बनावट नेपाल के राजविराज मार्ग स्थित कंकालिनी मंदिर के समान है। मां रक्तकाली मंदिर के ठीक सामने पगोडा आकार के मंदिर में 64 योगिनियों और बीच में भैरव की मूर्ति उत्कीर्ण है। परिसर में बाबा संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं, संत बाबा कारू खिरहरि, मां लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती और भगवान महादेव सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं। सहरसा शहर के मत्स्यगंधा क्षेत्र में स्थित यह स्थल पहले बंजर भूमि थी। अब इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। बिहार सरकार की ओर से यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया गया है। मंदिर की धार्मिक महत्ता, विशिष्ट बनावट और यहां स्थापित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर इसे अलग पहचान देते हैं। यहां प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी और मां रक्तकाली की पूजा-अर्चना के कारण इस मंदिर का विशेष महत्व रहता है।

