आगामी दिनांक 21 नवम्बर 2026 को आयोजित होने वाली एन.आई. एक्ट (परक्राम्य लिखत अधिनियम) से संबंधित विशेष लोक अदालत तथा दिनांक 12 दिसम्बर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारियों के मद्देनजर माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल श्री राजेश कुमार बच्चन ने बिरपुर में न्यायिक पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक में उन्होंने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने न्यायालयों में लंबित उपयुक्त एवं सुलहनीय मामलों को चिह्नित करते हुए अधिक से अधिक मामलों में पक्षकारों को नोटिस निर्गत करने की तैयारी सुनिश्चित करें। साथ ही, निर्गत नोटिसों का समयबद्ध एवं प्रभावी तामिला कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि नोटिसों के तामिला में पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) का भी सहयोग लिया जाए, ताकि पक्षकारों तक समय पर सूचना पहुंच सके और वे लोक अदालत में उपस्थित होकर अपने मामलों का आपसी सहमति से निष्पादन करा सकें। उन्होंने लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं आम लोगों के बीच विधिक जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
उक्त बैठक में श्री अमित गौरव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल; श्री विनय शंकर ( District and Additional Sessions Judge, बिरपुर; श्री विकास कुमार, सिविल जज (कनीय कोटि)-सह-न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, बिरपुर तथा श्री रमीजुर रहमान, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, बिरपुर उपस्थित रहे।
इसके उपरांत माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने बिरपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव के साथ भी बैठक की। उन्होंने अधिवक्ताओं से आगामी विशेष लोक अदालत एवं राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग एवं सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि न्यायिक पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं के सामूहिक प्रयास से अधिकाधिक मामलों का सौहार्दपूर्ण एवं त्वरित निष्पादन संभव है। उन्होंने विशेष रूप से सुलहनीय मामलों की पहचान कर पक्षकारों को समझौते के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्देशानुसार श्री अमित गौरव, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल ने भी बिरपुर में कार्यरत पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) के साथ बैठक की। बैठक में उन्हें लोक अदालतों के उद्देश्यों एवं महत्व के संबंध में आम लोगों को जागरूक करने, चिह्नित मामलों के पक्षकारों तक नोटिस एवं सूचना पहुंचाने तथा उन्हें लोक अदालत में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि PLVs न्यायालय एवं आम जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं तथा लोक अदालतों की सफलता में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसके पश्चात माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री राजेश कुमार बच्चन ने सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के साथ बिरपुर उपकारा का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने महिला वार्ड सहित उपकारा के अन्य सभी वार्डों, जेल अस्पताल एवं रसोईघर का जायजा लिया। उन्होंने बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, साफ-सफाई, भोजन की गुणवत्ता, चिकित्सा व्यवस्था तथा महिला बंदियों की विशेष आवश्यकताओं की जानकारी ली।
निरीक्षण के क्रम में उन्होंने बंदियों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को सुना तथा संबंधित जेल प्रशासन को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और बंदियों के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप स्वच्छता, स्वास्थ्य, भोजन एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से महिला बंदियों की सुरक्षा, सम्मान एवं आवश्यक सुविधाओं का ध्यान रखने पर बल दिया। साथ ही, बंदियों को उनके विधिक अधिकारों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा पात्र बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
इस प्रकार माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का बिरपुर दौरा आगामी लोक अदालतों की तैयारियों की समीक्षा के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था, विधिक जागरूकता एवं जेल में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के निरीक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

