स्वर कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर ने हमें कई यादगार फिल्मी और नॉन फिल्मी गीत दिए हैं। सिंगर ने अपने करियर में कुल 30 हजरा से अधिक गाने गाए हैं और कहा जाता है कि उनके गले में सीधे मां सरस्वती विराजमान थीं। लता मंगेशकर की मखमली आवाज में वो जादू था कि ये सीधे दिलों के तार छेड़ती थी। आज हम आपको लता मंगेशकर के एक ऐसे ही गीत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बोल इतने पवित्र थे कि कहा जाता है कि ये गीत इंसान ने नहीं भगवान ने लिखा है।
हम बात कर रहे हैं साल 1958 में आई फिल्म ‘सहारा’ (Sahara) के गीत ‘रुत आए रुत जाए’ के बारे में। इस गाने को लता मंगेशकर ने अपने सुर से सजाया और इसमें मीना कुमारी (Meena Kumari) नजर आईं। गीत के बोल भरत व्यास ने लिखे थे। यह क्लासिक और सदाबहार गीत जीवन के चक्र और समय के परिवर्तन को सुंदरता से दर्शाता है। यह कहता है कि जिस तरह ऋतुएं आती-जाती हैं, उसी तरह जीवन में सुख-दुख और समय का परिवर्तन भी शाश्वत है। हेमंत कुमार का शांत संगीत और भरत व्यास के अर्थपूर्ण बोल के लिए कहा जाता है कि ये इतने पवित्र थे कि ऐसा लगता था मानों भगवान ने लिखे हैं। फिल्म में मीना कुमारी के अलावा एम.राजन, कुल्दीप कौर और कन्हैयालाल भी नजर आए। वहीं अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो हिंदी ड्रामा फिल्म ‘सहारा’ एक अनाथ लड़की लीला (मीना कुमारी) के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो रूढ़िवादी समाज में भारी सामाजिक और भावनात्मक संघर्षों का सामना करती है।
