निलामी प्रक्रिया की जटिलता से कबाड़ बन रही हैं गाड़ियां।

वरदान न्यूज।
आदर्श थाना उदाकिशुनगंज  (मधेपुरा) थाने में विभिन्न
मामलों में जब्त की गई गाड़ियां दिनानुदिन कबाड़ में तब्दील होती जा रही है। राज्य में लागू शराब बंदी अधिनियम के बाद से थानों में जब्त वाहनों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इससे स्पष्ट है कि ऐसे वाहन पूरी तरह असुरक्षित हो चुके हैं।
थाना परिसर में सैकड़ों ऐसे वाहन है जो अपने मालिक के इंतजार में अब कबाड़ के लायक भी नहीं रह गए हैं। मालूम हो कि लावारिस वाहनों को एक निश्चित समय सीमा के बाद न्यायालय की प्रक्रिया के उपरांत नीलाम करने का प्रावधान है। लेकिन नीलामी प्रक्रिया में जटिलता होने के कारण थाने में महीनों एवं वर्षों से लगे वाहन कबाड़ खाने में तब्दील होती जा रही है। कुछ लोग न्यायालय के आदेश से अपने वाहन वापस ले जाते हैं। लेकिन बेनामी एवं लावारिस आदर्श थाना उदाकिशुनगंज परिसर में यत्र-तत्र खड़ी जब्त वाहन जंग खाने के लिए खड़े रह जाते हैं। आदर्श थाना उदाकिशुनगंज परिसर में जब्त वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि कई वाहनों के चारों ओर पेड़ एवं झाड़ी तक उग आए हैं। नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहनों को छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकार्ड में दर्ज करती है। इसके बाद न्यायालय को इसकी जानकारी दी जाती है। न्यायालय के
निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपकाकर या समाचार पत्रों के माध्यम से संबंधित जानकारी


सार्वजनिक की जाती है। ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके। लेकिन न्यायालय के जटिल
प्रक्रिया के कारण कोई भी थानाध्यक्ष नीलामी के पचरे में नहीं पड़ना चाहता है।
उदाकिशुनगंज थानाध्यक्ष सुधाकर कुमार  का कहना है कि जब्त वाहनों के मालिक यदि न्यायालय से रिलीज आर्डर लेकर आते हैं तो इन वाहनों को उनके हवाले कर दिया जाता है। शराब मामले में जब्त कई वाहनों को उच्च न्यायालय के आदेश
पर छोड़ दिया गया है। जिन वाहनों के मामले में लोगों के पास कागजात नहीं होते उनके मालिक गाड़ी वापसी
की कोशिश भी नहीं करते हैं। थानाध्यक्ष ने यह भी बताया कि जब्त वाहनों का सीजर लिस्ट बनाकर माल खाना में इंट्री की जाती है। साथ ही जब्त वाहनों को नीलाम करने की एक कानूनी प्रक्रिया है। सभी जब्त
वाहन केस से संबंधित रहते हैं। न्यायालय में केस खुलने पर उसका प्रदर्शन किया जाता है। केस फाइनल
होने के बाद ही जब्त वाहनों की हटाने की प्रक्रिया की जा सकती है। लेकिन न्यायालय में लंबे समय तक
केस की प्रक्रिया जारी रहने से तब तक थाना परिसर में लगे वाहन कबाड़ की स्थिति में तब्दील हो जाया करती है।

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