वरदान न्यूज, पुष्पम कुमार मधेपुरा।
🔴 स्थानीय जन प्रतिनिधि व विभाग बने है उदासीन ।
🔴 भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने के लिए हाल ही में 15वीं वित्त आयोग के तहत किया गया था जीर्णोद्धार।
प्रखंड क्षेत्र के खाड़ा पंचायत स्थित सुखासनी का सरकारी पोखर लगातार बढ़ते जलसंकट को देखते हुए,जल संरक्षण के लिए पुराने जलस्त्रोत को पुनर्जीवित करने का सरकार के स्तर से कई प्रयास किए जा रहे हैं।

जलस्त्रोत को बचाने के लिए वृहद कार्ययोजना पर केंद्र और राज्य सरकार काम कर रही है। इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं भी चला रखी है। जल-जीवन-हरियाली एवं अमृत सरोवर सहित अन्य कई योजनाएं चलाई गई है। बावजूद जन प्रतिनिधियों एवं विभागीय पदाधिकारी के उदासीनता के कारण योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी है।
इसका बानगी खाड़ा पंचायत के सुखासनी गांव स्थित सरकारी पोखर के कार्यों में देखने को मिल रहा है। यहां का पुराना सरकारी पोखर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जल-जीवन-हरियाली से भी इसका कायाकल्प पूर्णरूपेण संभव नहीं हो सका। यह सरकारी पोखर आज भी चारों ओर से अतिक्रमण का शिकार है।
दूसरी ओर पोखर में पशु चारा और कचरा के साथ अन्य गंदगी से भरा हुआ है।
पोखर किनारे गंदगी का अंबार है। स्थानीय लोग अपने घरों के कूड़े एवं गंदा पानी फेंक कर दिन प्रतिदिन इसको प्रदूषित करते जा रहे हैं।
कुछ वर्ष पूर्व पोखर से अतिक्रमण हटाने हेतु प्रशासनिक प्रयास हुआ था जो विफल साबित हुआ।
स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक अधिकारी को इसकी भनक तक नहीं है।
बताया जाता है कि स्थानीय कुछ दबंगों के मनोवल ऊंचा होने के कारण ऐसा हाल है।
इधर ग्रामीण दबी जुबान से बता रहे हैं कि सरकारी पोखर का अतिक्रमण पूर्णरूपेण हटाना अति आवश्यक ही नहीं बल्कि जरुरी है।
इस जलस्त्रोत में मौजूद गंदगी से बदबू आती जिससे बच्चों को बीमारी के खतरा से इनकार नहीं किया जा सकता। इसका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। खासकर वर्षा के दिनों में गंदगी से जल जनित विभिन्न रोगों का खतरा बना रहता है। कुछ महीना पहले इस पोखर का पानी काफी स्वच्छ था। इसका उपयोग विभिन्न कार्यों में किया जाता था। लेकिन आज पोखर की स्थिति काफी खराब है। वजह पोखर किनारे गंदा पानी और कचरा से पोखर काफी प्रदूषित हो चुका है।
लोगों ने अंचल प्रशासन सहित वरीय पदाधिकारी से सरकारी पोखर से अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

