
मधेपुरा। नगर परिषद मधेपुरा की कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी के तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही पद पर पदस्थापित रहने तथा उनके कार्यकाल में कथित अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत पर निगरानी विभाग ने संज्ञान लिया है। विभाग ने शिकायत पत्र को आवश्यक कार्रवाई के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार, पटना के प्रधान सचिव के पास भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद के प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
इस संबंध में बिहार सरकार के अपर सचिव रामाशंकर की ओर से 27 अक्टूबर 2026 को ज्ञापांक संख्या 8126 के माध्यम से पत्र जारी किया गया है। पत्र में मधेपुरा निवासी अमित कुमार एवं दीपक कुमार द्वारा ई-मेल के माध्यम से भेजे गए परिवाद पत्र की छायाप्रति नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भेजने का उल्लेख किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि शिकायतकर्ताओं को भी सूचनार्थ भेजी गई है।
दरअसल, संवेदक अमित कुमार एवं समाजसेवी दीपक कुमार ने मुख्यमंत्री को आवेदन भेजकर कार्यपालक पदाधिकारी तान्या कुमारी के कार्यकाल में कराई गई विभिन्न निविदाओं, विकास योजनाओं और भुगतानों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की थी। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि तान्या कुमारी का पदस्थापन जुलाई 2023 में नगर परिषद मधेपुरा में हुआ था। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके कार्यकाल में निविदा प्रक्रिया, योजनाओं के क्रियान्वयन तथा संवेदकों के चयन में कथित अनियमितताएं हुई हैं।
शिकायत में संवेदकों पर दबाव बनाने और योजनाओं के लिए मनमाने तरीके से संवेदकों का चयन किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा नगर परिषद के कंप्यूटर ऑपरेटर मानव कुमार कृष्णमूर्ति एवं क्लर्क दीपक कुमार की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि दोनों कर्मी लंबे समय से नगर परिषद में कार्यरत हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पदाधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
शिकायतकर्ताओं ने कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यकाल में संपन्न सभी निविदाओं, विकास योजनाओं और भुगतानों की निष्पक्ष जांच कराने के साथ संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मियों की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि तीन वर्षों से अधिक समय तक एक ही पद पर पदस्थापित रहने के मामले की भी समीक्षा होनी चाहिए।
इस मामले की शिकायत मुख्य सचिव, आर्थिक अपराध इकाई, नगर विकास एवं आवास विभाग, निगरानी विभाग तथा जिलाधिकारी मधेपुरा सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।
अब आगे की कार्रवाई पर टिकी नजरें
निगरानी विभाग द्वारा परिवाद पत्र को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के पास भेजे जाने के बाद अब सबकी निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। हालांकि, शिकायत को अग्रसारित किया जाना आरोपों की पुष्टि या जांच में दोष सिद्ध होना नहीं है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में जांच का आदेश देता है या नहीं और शिकायत में उठाए गए बिंदुओं पर क्या कार्रवाई की जाती है।
वरदा न्यूज, मधेपुरा।
