
ग्वालपाड़ा (मधेपुरा)। कभी छात्राओं की कम उपस्थिति के कारण सूना पड़ा ग्वालपाड़ा प्रखंड मुख्यालय स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय अब फिर से गुलजार होने लगा है। विद्यालय की वार्डन प्रतिमा कुमारी की पहल और अभिभावकों से लगातार संवाद का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। स्थिति यह है कि विद्यालय में नामांकित कुल 100 छात्राओं में से प्रतिदिन औसतन 91 छात्राएं उपस्थित हो रही हैं। छात्राओं की बढ़ती उपस्थिति को विद्यालय में लौटते भरोसे और सामान्य होती शैक्षणिक गतिविधियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दरअसल, विद्यालय में एक छात्रा की मौत की घटना के बाद छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के मन में चिंता उत्पन्न हो गई थी। इस घटना के बाद कई अभिभावकों ने अपनी बच्चियों को विद्यालय भेजना बंद कर दिया था। परिणामस्वरूप विद्यालय में छात्राओं की उपस्थिति काफी कम हो गई थी। ऐसी परिस्थिति में विद्यालय का माहौल सामान्य बनाना और अभिभावकों का विश्वास दोबारा जीतना बड़ी चुनौती थी।

इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए वार्डन प्रतिमा कुमारी ने पदभार संभालने के बाद अभिभावकों से सीधे संवाद स्थापित करने की पहल की। उन्होंने घर-घर जाकर अभिभावकों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं, शिकायतों एवं सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से सुना। साथ ही छात्राओं की सुरक्षा, नियमित निगरानी, बेहतर देखभाल और आवासीय व्यवस्था को लेकर उन्हें भरोसा दिलाया। वार्डन की इस पहल का असर धीरे-धीरे दिखाई देने लगा और अभिभावकों ने पुनः अपनी बच्चियों को विद्यालय भेजना शुरू कर दिया।
विद्यालय में अब पढ़ाई के साथ-साथ छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षणिक एवं आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। छात्राओं की नियमित उपस्थिति, उनकी देखभाल और विद्यालय की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इस कार्य में विद्यालय के संचालक उमेश कुमार पासवान, गार्ड विजय कुमार यादव सहित अन्य कर्मियों का भी सहयोग मिल रहा है। सभी के सामूहिक प्रयास से विद्यालय की गतिविधियां फिर से गति पकड़ने लगी हैं।
100 में 91 छात्राओं की प्रतिदिन उपस्थिति बनी सकारात्मक बदलाव की पहचान
कुल मिलाकर, वार्डन प्रतिमा कुमारी की अभिभावकों से सीधी बातचीत और विद्यालय व्यवस्था को बेहतर बनाने की पहल से छात्राओं की उपस्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि विद्यालय में सुरक्षा और अभिभावकों का भरोसा बनाए रखना निरंतर प्राथमिकता का विषय रहेगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विद्यालय प्रबंधन इस सकारात्मक बदलाव को आगे भी किस तरह कायम रखता है।
