सुपौल।
बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से संपन्न और आयकर देने वाले लोगों से बिजली सब्सिडी छोड़ने की अपील पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता, हल्ला बोल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनुपम ने कहा कि सरकार जनता से त्याग की अपेक्षा करने के बजाय पहले सरकारी धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर जवाबदेही सुनिश्चित करे।
अनुपम ने कहा कि मुख्यमंत्री का तर्क है कि बिहार सरकार बिजली सब्सिडी पर प्रतिवर्ष करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। संपन्न लोग यदि 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ दें तो बची राशि विकास कार्यों में लगाई जा सकती है। लेकिन सवाल है कि सरकारी खजाने पर आर्थिक बोझ के लिए केवल नागरिकों से त्याग की अपेक्षा क्यों की जा रही है? सरकारी धन का सदुपयोग और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री से पूछे पांच सवाल
अनुपम ने मुख्यमंत्री से पांच बिंदुओं पर जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि क्या मुफ्त बिजली देना सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी नहीं है, जिसे नागरिकों पर एहसान के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है? बिजली सब्सिडी पर खर्च हो रहे 23 हजार करोड़ रुपये का विस्तृत हिसाब, लाभार्थियों की संख्या और उपभोक्ता श्रेणियों के अनुसार खर्च का ब्योरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
उन्होंने यह भी पूछा कि संपन्न लोगों के सब्सिडी छोड़ने से होने वाली बचत शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क और ग्रामीण विकास पर किस अनुपात में तथा किस समयसीमा के भीतर खर्च की जाएगी? बिजली विभाग में कथित भ्रष्टाचार और सरकारी ठेकों की अनियमितताओं की जांच पूरी कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? सरकारी खजाने को हुए संभावित नुकसान की वसूली के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
इसके अलावा उन्होंने सरकार से शिक्षा, खेल और ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए वास्तविक बजट, कार्ययोजना और समयबद्ध लक्ष्य सार्वजनिक करने की मांग की।
अनुपम ने कहा कि 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने का निर्णय सरकार की नीतिगत जिम्मेदारी है और उसके वित्तीय प्रबंधन की जवाबदेही भी सरकार की ही है। संपन्न नागरिकों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील की जा सकती है, लेकिन इसे सरकारी वित्तीय प्रबंधन की कमियों और भ्रष्टाचार से जुड़े सवालों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि जनता सरकार से केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और धरातल पर परिणाम चाहती है। जनता से त्याग मांगने से पहले सरकार को अपने तंत्र में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना चाहिए। विकास का रास्ता सार्वजनिक धन की रक्षा और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगाकर ही निकलेगा।

