जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा संचालित सुरक्षित बचपन अभियान के छठे दिन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

सुपौल/निर्मली। शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा संचालित “सुरक्षित बचपन अभियान” के छठे दिन जिले के विभिन्न विद्यालयों में बाल अधिकार, बाल सुरक्षा एवं बाल विवाह निषेध से संबंधित विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में निर्मली अनुमंडलीय न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में ASHA SOP, 2025 (बाल विवाह निषेध संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया) पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल श्री राजेश कुमार बच्चन ने की। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री अमित गौरव सहित न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, अधिवक्ता, पैरा लीगल वॉलंटियर्स तथा आम नागरिक उपस्थित रहे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश का संबोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा एवं उनके समग्र विकास को प्रभावित करने वाली एक गंभीर सामाजिक समस्या है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह का निषेध केवल कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से ही नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, सामाजिक सहभागिता एवं सामूहिक जिम्मेदारी के विकास से भी संभव है। उन्होंने सुरक्षित बचपन अभियान के अंतर्गत विद्यालयों एवं समुदायों में आयोजित किए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।

सचिव, DLSA का संबोधन

जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव श्री अमित गौरव ने कहा कि ASHA SOP, 2025 के माध्यम से बाल विवाह निषेध से संबंधित जागरूकता, रोकथाम एवं विभिन्न संबंधित संस्थाओं के बीच समन्वय को प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विद्यालयों, पंचायतों, प्रशासन, पुलिस, अधिवक्ताओं, स्वयंसेवकों एवं आम नागरिकों को बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता फैलाने तथा संभावित बाल विवाह की सूचना संबंधित सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

न्यायिक पदाधिकारियों की सहभागिता

कार्यक्रम में सिविल जज (सीनियर डिवीजन), निर्मली श्री श्याम नाथ साह ने कहा कि बाल विवाह निषेध कानून के प्रति जागरूकता विकसित करना समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। मुंसिफ, निर्मली श्री भावेश कुमार ने कहा कि विधिक जागरूकता कार्यक्रम आम नागरिकों को कानून की जानकारी प्रदान करने का प्रभावी माध्यम हैं और बाल विवाह जैसी कुरीतियों के विरुद्ध सभी वर्गों से सक्रिय सहयोग की अपील की।

ASHA SOP, 2025 पर विशेष प्रस्तुति

कार्यक्रम के दौरान ADCP श्री दिवेश कुमार शर्मा द्वारा ASHA SOP, 2025 विषय पर विस्तृत पावर पॉइंट प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बाल विवाह निषेध से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया, रोकथाम, पहचान, संबंधित अधिकारियों एवं संस्थाओं की भूमिका तथा समय पर सूचना एवं समन्वित कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला।

प्रशासन, पुलिस एवं अधिवक्ताओं की सहभागिता

कार्यक्रम में DSP एवं SDO, निर्मली ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए प्रशासन एवं पुलिस की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। निर्मली बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं सचिव ने भी विधिक जागरूकता फैलाने में अधिवक्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के इस पहल की सराहना की।

पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs), आम नागरिकों तथा NGO SEVS के श्री भगवान पाठक एवं श्री प्रकाश कुमार की भी सक्रिय सहभागिता रही।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ASHA SOP, 2025 के अंतर्गत बाल विवाह निषेध संबंधी जागरूकता बढ़ाना, विभिन्न संस्थाओं की भूमिका को रेखांकित करना तथा समाज में बाल विवाह के विरुद्ध सामूहिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना था।

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