अनुपम ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दलित समाज से आते हैं और देश के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उनकी सभा के बाद संबंधित स्थान के कथित शुद्धिकरण की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान के आधार पर ऐसा व्यवहार किया गया, तो यह सामाजिक समानता, संवैधानिक मूल्यों और मानवीय गरिमा पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। भाजपा को ऐसी घटनाओं और जातिगत भेदभाव के आरोपों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणियों से लेकर खड़गे के प्रति की गई टिप्पणियों तक, भाजपा को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण पर जवाब देना चाहिए।
अनुपम ने एलन मस्क से जुड़े उस प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसमें उद्योगपति मुकेश अंबानी के लिए ‘Mr Prime Minister’ संबोधन को लेकर चर्चा हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा नेताओं ने इस प्रसंग पर वैसी मुखर प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी, जैसी खड़गे जी के बयान को लेकर दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय नेतृत्व के सम्मान से जुड़े सवालों पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है।
उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर कटाक्ष करते हुए कहा, “शाह और शहंशाह सत्ता के अहंकार से बाहर निकलें और जनता के सवालों का जवाब देना सीखें। लोकतंत्र में कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन जनता की ताकत सर्वोपरि होती है। विपक्ष को डराने और बदनाम करने की राजनीति छोड़कर भाजपा को अपने कामकाज और अपने नेताओं की भाषा पर ध्यान देना चाहिए। जनता सब देख रही है और समय आने पर इसका जवाब भी देगी।”
भाजपा के विरोध प्रदर्शन पर कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता राजेश कच्छप ने कहा कि भाजपा एक मुहावरे को लेकर प्रधानमंत्री के अपमान का आरोप लगाकर विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कर रही है। लेकिन जब विपक्षी नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तब भाजपा का नैतिक आक्रोश कहां चला जाता है? उन्होंने सवाल किया कि क्या राजनीतिक मर्यादा के नियम केवल विपक्ष के लिए हैं और भाजपा नेताओं को उनसे छूट मिली हुई है?
वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. श्रॉफ ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत अपमान के बीच के अंतर को समझती है। किसी बयान पर आपत्ति होने पर उसके पूरे संदर्भ को सामने रखकर तथ्यों और तर्कों के आधार पर जवाब दिया जाना चाहिए। चुनिंदा शब्दों को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना और जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना स्वस्थ लोकतंत्र के हित में नहीं है।
सुपौल प्रखंड प्रभारी शाहिद खान ने अपने संबोधन में कहा कि देश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याओं और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब चाहती है। भाजपा इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय बयानों को लेकर विवाद खड़ा करने में अपनी राजनीतिक ऊर्जा लगा रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि जवाबदेही भी चाहती है।
वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता शत्रुघ्न प्रसाद चौधरी ने कहा कि भाजपा को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि सत्ता के बल पर विपक्ष की आवाज दबाई जा सकती है। दलित सम्मान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के सवालों पर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उन राजनीतिक प्रवृत्तियों के खिलाफ है जो लोकतांत्रिक असहमति को दबाने और समाज में भेदभाव को बढ़ावा देने का काम करती हैं।
संविधान और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प
कार्यक्रम में भारी संख्या में उपस्थित कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर के आंबेडकर चौक पर प्रधानमंत्री मोदी का सांकेतिक पुतला दहन करके अपना विरोध जताया। उपस्थित कांग्रेसजनों ने एक स्वर में कहा कि कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा के विरोध प्रदर्शन से कांग्रेस की आवाज कमजोर नहीं होगी, बल्कि पार्टी जनता के बुनियादी मुद्दों को और मजबूती से उठाती रहेगी।


