सुरक्षित बचपन अभियान के दूसरे दिन सुपौल, वीरपुर एवं निर्मली के विद्यालयों में बाल अधिकारों एवं संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम

सुपौल। बच्चों के चेहरे पर मुस्कान, मन में आत्मविश्वास और जीवन में सुरक्षा का भाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा परिकल्पित “सुरक्षित बचपन अभियान” के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल द्वारा दूसरे दिन भी जिले के विभिन्न विद्यालयों में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

माननीय श्री राजेश कुमार बच्चन, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, DLSA, सुपौल के मार्गदर्शन में यह अभियान सुपौल के साथ-साथ अनुमंडल वीरपुर एवं निर्मली में भी संचालित किया जा रहा है।

बच्चों को अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने की पहल
कार्यक्रमों में न्यायिक पदाधिकारियों, बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्यों, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के कर्मियों, पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) तथा NGO SSEVS के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। बच्चों को POCSO अधिनियम, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान, बाल यौन शोषण से बचाव, ऑनलाइन सुरक्षा तथा किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में सरल एवं संवादात्मक तरीके से जागरूक किया गया।

माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, DLSA, सुपौल का संदेश
माननीय श्री राजेश कुमार बच्चन ने कहा, “प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने, सम्मान के साथ शिक्षा प्राप्त करने और बिना भय के अपनी बात रखने का अधिकार है। बच्चों को जागरूक बनाना तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

सचिव, DLSA, सुपौल श्री अमित गौरव का संदेश
श्री अमित गौरव ने कहा, “विधिक जागरूकता का वास्तविक उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों से परिचित कराने के साथ उनमें आत्मविश्वास विकसित करना है, ताकि वे किसी भी अनुचित परिस्थिति को पहचानकर समय पर सहायता प्राप्त कर सकें। इसके लिए विद्यालयों, सरकारी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों का समन्वित प्रयास आवश्यक है।”

SSEVS की सहभागिता
अभियान में NGO SSEVS का सक्रिय सहयोग बच्चों तक बाल संरक्षण का संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संगठन के प्रतिनिधि बच्चों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें जागरूक बनाने तथा सुरक्षित एवं संवेदनशील वातावरण के निर्माण में योगदान दे रहे हैं।

अभियान का प्रथम चरण 26 से 31 अक्टूबर, 2026 तक जारी रहेगा। आगामी चरण में नामित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने पर बल दिया जाएगा, ताकि विद्यालयों में बाल अधिकारों एवं सुरक्षा संबंधी जागरूकता निरंतर बनी रहे।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल का संकल्प है कि “सुरक्षित बचपन केवल एक अभियान नहीं, बल्कि हर बच्चे के सुरक्षित भविष्य का संकल्प है।”

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