सुपौल।
Mediation for Nation 3.0 के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सुपौल की ओर से जिले में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से लोगों को मध्यस्थता की प्रक्रिया, उसके महत्व एवं लाभों के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह अभियान 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार राजेश कुमार बच्चन के निर्देशन तथा DLSA के सचिव अमित गौरव के पर्यवेक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों, ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों के साथ-साथ अनुमंडल विधिक सेवा समिति, बीरपुर एवं निर्मली के क्षेत्रों में भी लगातार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रमों के दौरान आम लोगों को बताया जा रहा है कि कई प्रकार के विवादों का समाधान लंबी न्यायिक प्रक्रिया में जाने के बजाय आपसी संवाद, सहमति और सौहार्दपूर्ण समझौते के माध्यम से किया जा सकता है। मध्यस्थता पक्षकारों को अपने विवाद का समाधान आपसी सहमति से तलाशने का अवसर प्रदान करती है।
अभियान को सफल बनाने में पैनल अधिवक्ताओं एवं पैरा-लीगल वॉलंटियर्स (PLVs) की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से सीधे संवाद कर मध्यस्थता के लाभों की जानकारी दे रहे हैं और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाओं से अवगत करा रहे हैं।
DLSA की ओर से बताया गया कि मध्यस्थता समय और संसाधनों की बचत में सहायक होने के साथ-साथ पक्षकारों के बीच आपसी संबंध और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। Mediation for Nation 3.0 के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को इस वैकल्पिक एवं सहयोगात्मक विवाद समाधान प्रक्रिया से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
संवाद और सहमति को दें प्राथमिकता
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, DLSA राजेश कुमार बच्चन ने जिलेवासियों से मध्यस्थता के महत्व को समझने और विवादों के समाधान में संवाद, सहमति एवं सौहार्द को प्राथमिकता देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से मध्यस्थता के लाभों की जानकारी अपने परिवार, मित्रों एवं आसपास के लोगों तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक न केवल अपने विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में कदम बढ़ाता है, बल्कि समाज में संवाद, सहयोग एवं आपसी सौहार्द की संस्कृति को भी मजबूत करता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि “विवाद को बढ़ाने के बजाय संवाद को अवसर दें और समाधान की दिशा में मध्यस्थता को एक प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाएं।”

