सुपौल रविवार को पूरे जिले में लक्ष्मी पूजा प्रकाश और उत्साह का सबसे बड़ा पर्व दीपावली पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक इस पावन पर्व को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा गया।
त्योहार को लेकर हफ़्तों पहले से ही घरों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट का दौर जारी था। घरों को रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और दीयों से सजाया गया था। शाम होते ही चारों तरफ दीपों की जगमगाहट से पूरा माहौल रोशन हो उठा।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए थे। इस दिन रात्रि में घरों और दुकानों में माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने एक-दूसरे का मुँह मीठा कराया, उपहार बांटे और शुभकामनाएं दीं। बच्चों ने आतिशबाजी का आनंद लिया। पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई जगहों पर लोगों ने मिट्टी के दीयों और इको-फ्रेंडली तरीके से पर्व मनाया।


