
जब एक लड़की पढ़ती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है” – इसी सोच के साथ छुट्टी के दिन भी गांव-गांव जाकर कर रही हैं जागरूकता
उदाकिशुनगंज/मधेपुरा।
जहां एक ओर विद्यालय में अवकाश होते ही लोग आराम करते हैं, वहीं उदाकिशुनगंज की एक शिक्षिका अवकाश के दिनों में और भी अधिक मेहनत कर शिक्षा की अलख जगा रही हैं। हम बात कर रहे हैं माध्यमिक शिक्षिका अमृता कुमारी की।
अमृता कुमारी विद्यालय अवकाश में भी लगातार ग्रामीण इलाकों में जाकर, खासकर लड़कियों को विद्यालय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। उनका मानना है कि अवकाश के दिन अन्य दिनों से अधिक काम करना चाहिए, क्योंकि इसी दिन अभिभावकों से मिलना आसान होता है।

अमृता जी कहती हैं, “जब एक लड़की पढ़ लेती है तो वह पूरा परिवार शिक्षा के प्रति जागरूक हो जाता है। शिक्षक का फर्ज सिर्फ विद्यालय तक नहीं, समाज के प्रति भी है।”
उनके प्रयासों की झलक –

- उनके प्रयास से सैकड़ों बच्चे जो विद्यालय से बाहर थे, आज विद्यालय से जुड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, खासकर वंचित समाज के बच्चे।
- उनके मार्गदर्शन में दर्जनों लड़कियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।
- पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाते हुए उन्होंने हजारों वृक्षों का वृक्षारोपण कराया है, जो अपने आप में एक मिसाल है।
- लगभग 500 छात्र-छात्राओं को NCC कैडेट में शामिल करवाकर उन्हें अनुशासन और देशभक्ति से जोड़ा है।
- कोरोना जैसी आपदा में भी उन्होंने मोबाइल के माध्यम से बच्चों को पढ़ाना नहीं छोड़ा और लोगों को कर्तव्य के प्रति जागरूक किया।
अमृता कुमारी ने बताया कि वे शिक्षक-अभिभावक संवाद को शिक्षा की नींव मानती हैं। इसी संवाद से शिक्षा को आगे ले जाया जा सकता है। वे कहती हैं कि शिक्षक के प्रयास में कभी कमी नहीं आनी चाहिए।
उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मधेपुरा जिला शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और मुख्यमंत्री के “दिन-रात मेहनत” के मंत्र को वे पूरी तरह से अपना रही हैं।
निश्चित रूप से अमृता कुमारी जैसी शिक्षिका आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
“छुट्टी के दिन भी गांव में लड़कियों को शिक्षा के प्रति जागरूक करतीं शिक्षिका अमृता कुमारी”
