निर्मली
सुपौल न्यायमंडल के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन ने शनिवार, 31 अक्टूबर को निर्मली सिविल कोर्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय के सभा कक्ष में आयोजित बाल विवाह रोकथाम एवं राष्ट्रीय लोक अदालत विषयक एक दिवसीय जागरूकता बैठक में भी भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता निर्मली व्यवहार न्यायालय के वरीय न्यायाधीश डॉ. श्याम नाथ साहू ने की, जबकि मंच संचालन स्थानीय विधिज्ञ संघ के अध्यक्ष विमल ओझा ने किया। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव आलोक कुमार गौरव, एसडीएम धीरज कुमार सिन्हा, एसडीपीओ अनिवेश नारायण, न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
बैठक में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकने, इसके कानूनी प्रावधानों तथा राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अधिकारियों ने संबंधित विषयों पर लोगों को जागरूक किया।
इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश कुमार बच्चन ने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को रोकना हम सभी का दायित्व और कर्तव्य है। इसके लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम गांवों में भी आयोजित कराना प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक कानूनी जानकारी पहुंच सके।
इस दौरान विधिज्ञ संघ के सचिव भोला प्रसाद यादव एवं पूर्व अध्यक्ष सह अधिवक्ता कल्याण समिति, कोसी प्रमंडल सहरसा के वर्तमान अध्यक्ष रामलखन प्रसाद यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बाल विवाह रोकथाम एवं विधिक जागरूकता के महत्व पर अपने विचार रखे और कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर धरातल पर उतारने में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से निर्मली विधिज्ञ संघ की ओर से प्रत्येक गुरुवार को लोगों को निःशुल्क कानूनी सलाह दी जा रही है।
नवनिर्मित भवन का किया निरीक्षण
जागरूकता बैठक के बाद प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने निर्मली सिविल कोर्ट के नवनिर्मित भवन का निरीक्षण किया। उन्होंने न्यायालय परिसर में अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं से बातचीत कर विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान स्थानीय न्यायालय के अधिकारियों एवं कर्मियों ने उन्हें भगवान बुद्ध का प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। वहीं, निर्मली सिविल कोर्ट की स्थापना के लिए अधिवक्ताओं द्वारा किए गए संघर्ष पर आधारित स्मारिका भी उन्हें भेंट की गई।
अधिवक्ताओं ने रखीं कई मांगें
निरीक्षण के दौरान स्थानीय अधिवक्ताओं ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को मांग पत्र सौंपकर अधिवक्ताओं के लिए वकालतखाना निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध कराने, फौजदारी वादों का संचालन शुरू कराने, फ्रैंकिंग मशीन उपलब्ध कराने तथा जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में आम लोगों को हो रही परेशानी दूर कराने का अनुरोध किया। इस पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अपने स्तर से सकारात्मक पहल किए जाने की बात कही।
निरीक्षण के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने न्यायालय परिसर में पौधरोपण भी किया।

