दुबई से संचालित आॅनलाइन नेटवर्क का पुलिस ने किया पर्दाफाश

सात गिरफ्तार, 40 हजार करोड़ का नेटवर्क

पलामू पुलिस ने महादेव बेटिंग ऐप की तर्ज पर संचालित एक विशाल आॅनलाइन बेटिंग नेटवर्क का पदार्फाश किया है। यह नेटवर्क ‘खेलोयार साइट’ के माध्यम से सैकड़ों करोड़ रुपये का रोजाना ट्रांजेक्शन करता था। हुसैनाबाद में छापेमारी कर पुलिस ने सात आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क का संचालन छत्तीसगढ़ के भिलाई से और सर्वर दुबई से संचालित हो रहे थे।
हुसैनाबाद अनुमंडल कार्यालय के पीछे कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पुलिस को मिली थी। सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने छापेमारी की और सात युवकों को पकड़ा। पूछताछ में पूरा नेटवर्क सामने आया और खेलोयार साइट का कनेक्शन जुड़ा।
गिरफ्तार आरोपियों में राहुल सिंह (भिलाई, छत्तीसगढ़), सुजीत कुमार विश्वकर्मा (मदनपुर, बिहार),अजित कुमार विश्वकर्मा (मदनपुर, बिहार), रोहित कुमार सिंह (मदनपुर, बिहार), जुबेर अंसारी (जगेश्वर बिहार बोकारो) अयाज आलम (पतरातू, रामगढ़) व अक्षय कुमार (तमाड़, रांची) शामिल हैं। ये सभी हुसैनाबाद के एक किराए के मकान में बैठकर आनलाइन बेटिंग आपरेट कर रहे थे।
पलामू में पकड़े गए आरोपित इस नेटवर्क का फ्रेंचाइजी नंबर 141 है। यह प्रतिदिन 5 से 7 लाख रुपये तक का ट्रांजेक्शन करता था और 5 से 6 हजार सदस्य इससे जुड़े हुए थे। इसी नेटवर्क के अन्य फ्रेंचाइजी 50 से 60 लाख रुपये तक का रोजाना ट्रांजेक्शन करते हैं। नेटवर्क का मास्टरमाइंड बिहार के औरंगाबाद के राजन कुमार सिंह और छत्तीसगढ़ के भिलाई का शेल्वी उर्फ मनीष है।
हजारीबाग पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग म्युल अकाउंट खुलवाने की कोशिश कर रहे हैं। सूचना पलामू पुलिस के साथ साझा की गई, जिसके बाद पूरे नेटवर्क पर नजर रखी गई और कार्रवाई की गई। यह नेटवर्क बड़े पैमाने पर म्युल बैंक अकाउंट, क्रिप्टो वॉलेट और हवाला चैनल का उपयोग करता था। दुबई में बैठा प्रमोटर हर फ्रेंचाइजी को ट्रांजेक्शन का 30 प्रतिशत कमीशन देता है।
फ्रेंचाइजी अपने संचालन के लिए 10 से 15 म्युल बैंक खातों का उपयोग करते हैं। इन खातों को 5-6 हजार रुपये महीना किराए पर लिया जाता है। एक खाता केवल एक महीने के लिए उपयोग होता है, उसके बाद उसे मूल खाते धारक को लौटा दिया जाता है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मास्टरमाइंड शेल्वी उर्फ मनीष और राजन कुमार सिंह पहले पुणे व बड़े शहरों में अन्य बेटिंग एप से जुड़े थे। दोनों ने वहां ट्रेनिंग ली और इसके बाद दुबई के प्रमोटर के साथ मिलकर अपना नेटवर्क तैयार किया।
यह दोनों ऐसे युवकों को फ्रेंचाइजी देते थे जो गांव से नौकरी के लिए बाहर जाने वाले, कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर होते थे। उन्हें बहलाकर फ्रेंचाइजी दी जाती और फिर बेटिंग एप के जरिये साइबर फ्रॉड करवाया जाता था।
खेलोयार साइट के सभी सर्वर दुबई में मौजूद हैं। नेटवर्क भारत के अलावा कई देशों में फैला हुआ है और इसका अनुमानित अवैध कारोबार लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ट्रांजेक्शन के लिए क्रिप्टोकरेंसी और हवाला का उपयोग किया जाता था, जिससे पैसों के प्रवाह का पता लगाना मुश्किल होता है।

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