
“मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंजिल मगर,
लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया।”
ये पंक्तियां मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड निवासी समाजसेवी, साहित्यकार एवं शिक्षक संजय कुमार सुमन के व्यक्तित्व और उनकी सामाजिक यात्रा को बखूबी दर्शाती हैं। पिछले 34 वर्षों से वे निःस्वार्थ भाव से समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता में जुटे हैं। उनका जीवन मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रेरणादायक उदाहरण है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित
संजय कुमार सुमन का मानना है कि धरती को हरा-भरा बनाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण तैयार करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ वे वर्षों से पौधारोपण और पौधों की देखभाल करते आ रहे हैं। अब तक वे पांच हजार से अधिक पौधे लगा चुके हैं। उनके द्वारा लगाए गए कई पौधे आज बड़े वृक्षों का रूप ले चुके हैं।
उनका पर्यावरण संरक्षण का प्रयास केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उनकी देखभाल भी बच्चों की तरह करते हैं। उनके प्रकृति प्रेम से प्रेरित होकर दूसरे लोग भी पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
मानव सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य
संजय कुमार सुमन का सेवाभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी लगातार सक्रिय रहते हैं। रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से वे रक्तदान शिविरों के आयोजन में योगदान देते रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अस्पतालों में मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था कराने के साथ स्वयं भी रक्तदान करते हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने स्लम क्षेत्रों में मास्क, साबुन और हैंड सैनिटाइजर वितरित कर लोगों की सहायता की। ठंड के मौसम में जरूरतमंदों के बीच कंबल एवं चादर का वितरण करना भी उनकी सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा है। इसके अतिरिक्त वे गंदगी और कूड़े-कचरे से भरी सड़कों की सफाई के लिए समय-समय पर अभियान चलाते हैं। उनके ये प्रयास समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करते हैं। उनके निःस्वार्थ सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें सौ से अधिक समाजसेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा का संगम
संजय कुमार सुमन एक शिक्षक होने के साथ-साथ लेखक, कवि, युवा वक्ता और मोटिवेशनल स्पीकर भी हैं। शिक्षा को सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए वे ग्रामीण बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करते हैं। उनका प्रयास है कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण किसी बच्चे की शिक्षा प्रभावित न हो। कला, संस्कृति और साहित्य के प्रति भी उनकी गहरी रुचि है। वे अपनी रचनात्मकता और वक्तृत्व कला के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि शिक्षा, साहित्य और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने तथा लोगों में मानवीय मूल्यों को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
परिवार, समाज और कार्यक्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद संजय कुमार सुमन ने अपने सामाजिक उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखी है। उनका जीवन बताता है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए केवल संसाधनों की नहीं, बल्कि दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता की भी आवश्यकता होती है। उनकी 34 वर्षों की सेवा यात्रा युवाओं को यह संदेश देती है कि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए उपयोगी योगदान दे सकता है। जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान और शिक्षा के प्रसार जैसे कार्य सामूहिक प्रयासों से व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं। संजय कुमार सुमन का व्यक्तित्व इस बात का उदाहरण है कि सच्ची समाजसेवा किसी पद या प्रतिष्ठा की मोहताज नहीं होती। दूसरों के जीवन में उम्मीद जगाना, प्रकृति की रक्षा करना और वंचितों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही सेवा का वास्तविक उद्देश्य है। उनका समर्पण समाज के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को मानवता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश देता है।
