सदियों से गढ़ बरुआरी मेला: दुर्गा पूजा की भव्य तैयारी, गढ़ बरुआरी पूर्व और पश्चिम में देखने को मिलता है मेला, पचमहला का मेला बिहार के मेलों में इनका नाम अलग, दर्शक**सुपौल।* सदियों से *गढ़ बरुआरी मेला* में दुर्गा पूजा की भव्य तैयारी देखने को मिलती है। *गढ़ बरुआरी पूर्व और पश्चिम* में इस मेले की अलग ही रौनक देखने को मिलती है।*पचमहला का मेला* बिहार के मेलों में इनका नाम अलग है। दर्शक दूर-दूर से इस मेले को देखने के लिए आते हैं। करीब *200 वर्ष पूर्व* से यहां पर प्रसिद्ध *मां दशमा विद्या की मूर्ति* राजा के जमाने से ही सदियों से है और धूमधाम से मनाई जाती है।आज मैंने मंदिर का निरीक्षण किया और पाया कि विधि से मिलकर सारी व्यवस्थाओं का जायजा लेने के बाद अच्छा लगा। मंदिर में पूजा की तैयारी पूरी हो चुकी है। साफ-सफाई, बिजली, पानी, सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर भी जायजा लिया गया।दुर्गा पूजा को लेकर भक्तों में काफी उत्साह है। मेले में तरह-तरह की दुकानें, झूले और मनोरंजन के साधन भी लगाए जाते हैं।वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेला सिर्फ पूजा का ही नहीं, बल्कि भाईचारे और आपसी प्रेम का भी प्रतीक है। इस मेले में सभी जाति और धर्म के लोग मिलकर आते हैं।
