दुर्गा पूजा के अवसर पर विभिन्न कथा / थीम / झांकी पर विशेष प्रकार का अस्थायी पंडाल का निर्माण / सिंथेटिक सामग्री से बने कपड़े या रस्सी का प्रयोग किया जाता है तथा आम लुक गुड़िया का अनुपालन किया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त इनके अंदर पर पूजा व्यवस्था में बिजली उपकरण, जेनरेटर, प्रकाश, गैस, लाउडस्पीकर तथा खाना बनाने के लिए अग्नि उपकरणों का प्रयोग किया जाता है, जिससे अग्निकांड की संभावना बढ़ जाती है। पूजा पंडाल निर्माण संबंधी कुछ सावधानी बरतनी आवश्यक है और समझदारी की कुछ सावधानी है जो निम्नवत है और अधिकतम दुर्घटना और जान-माल की क्षति से बचाया जा सकता है। पूजा पंडाल निर्माण संबंधी कुछ आवश्यक सावधानी बरतने वाली सावधानियां नीचे दी गई हैं। कुछ सावधानियां बरतने की चर्चा भी नीचे दी गई है।
क्या करें :-
- पंडाल निर्माण यथासंभव भारतीय मानक पद्धति IS-8758-1993 के अनुसार किया जाए।
- पंडाल फायर रिटार्डेंट केमिकल से उपचारित किया हुआ सूती कपड़े का होना चाहिए।
- अग्नि सुरक्षा हेतु पंडाल में कम से कम निम्न अग्निशमन यंत्र रखे जाएं:-
I. ABC टाइप – 4 भाग (मात्रा में)
II. कार्बन डाई ऑक्साइड – 2 भाग (मात्रा में)
III. बोरेक्स – 1 भाग (मात्रा में)
IV. बोरिक एसिड – 1 भाग (मात्रा में)
V. एमोनियम – 1 भाग (मात्रा में)
VI. पानी – 39 भाग (मात्रा में) - पंडाल के अंदर एक ही जगह पर अस्थायी विद्युत कनेक्शन दिया जाए।
- पंडाल का निर्माण बिजली तार, विद्युत सब-स्टेशन, चिमनी या मंदिर के 15 मीटर के अंदर न किया जाए।
- पंडाल के चारों ओर 4-5 मीटर खुला स्थान रखें।
- विद्युत वायरिंग ISI मार्क के तारों से एवं लाइसेंसी इलेक्ट्रीशियन द्वारा करवाई जाए।
- पंडाल के बाहर पर्याप्त पानी और मिट्टी से भरी बाल्टियाँ रखी जाएं।
- बिजली के तारों को बांस के ऊपर से न ले जाया जाए।
- यदि कपड़ा या पंडाल के तार का इंसुलेशन क्षतिग्रस्त हो तो तुरंत बदलें।
- बिजली के कार्य के लिए इलेक्ट्रीशियन को ही बुलाया जाए।
- पूजा करते समय अगरबत्ती / धूप / दीया सावधानी से एवं सुरक्षित स्थान पर जलाएं। अगरबत्ती / धूप को कपड़े के निकट न जलाएं।
- प्राथमिक उपचार हेतु पंडाल में फर्स्ट एड बॉक्स रखें।
- दमकल सेवा का टोल फ्री नंबर 101/112 की तुरंत सूचना दें एवं स्पष्ट पता बताएं।
- सभी महत्वपूर्ण फोन नंबरों को पंडाल में प्रमुख जगह पर प्रदर्शित करें।
- खाना पकाने जैसी आग की गतिविधि पंडाल से दूर ही रखें।
- आपातकालीन निकास द्वार से संबंधित सभी बाधाओं को दूर रखें।
- पंडाल जलने के समय सभी एकजुट होकर पानी से आग बुझाने का प्रयास करें।
- थोड़ी देर में न बुझने पर तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दें और पंडाल खाली करवाएं।
- सबसे पहले पंडाल में उपस्थित सभी लोगों को सुरक्षित निकालें।
- खुले मैदानों और खुले स्थानों पर पंडाल बनाना सुरक्षित है।
- घास-फूस से बने पंडाल और घास-फूस के घरों के पास पटाखे / माचिस और अन्य ज्वलनशील पदार्थों वाले पटाखे नहीं फोड़ें।
क्या न करें :-
- पंडाल 03 मीटर से कम ऊँचा न बनाएं।
- पंडाल बनाने में सिंथेटिक सामग्री का प्रयोग न करें।
- कपड़े या अन्य ज्वलनशील सामग्री का प्रयोग न करें।
- बिजली की लड़ी के नीचे सामान का निर्माण न करें।
- किसी भी स्थिति में बिजली के तारों को खुला न छोड़ें।
- बिजली के तारों में कटौती न करें।
- इलेक्ट्रिक मीटर का प्रयोग पंडाल के अंदर न करें।
- पंडाल निर्माण में बांस का प्रयोग न करें (लोहे का प्रयोग करें)।
- पंडाल के अंदर धूम्रपान का प्रयोग न करें।
- पंडाल के अंदर नंगी बिजली न लगाएं।
- किसी भी ज्वलनशील पदार्थ की अनुमति से न रखें और पटाखे नहीं जलाएं।
- पंडाल में या विशालकाय स्तर पर पटाखे नहीं जलाएं।
- घर के अंदर कभी भी टॉर्च नहीं जलाने दें।
- जब तक पंडालों के बीच कभी भी हाथ में ज्वलनशील पदार्थ लेकर न जाएं।
- ज्वलनशील और तेल आधारित किसी भी पदार्थ को पास में भी भंडारण न करें।
- आबादी वाले स्थानों में दुर्घटना नहीं होने दें और पटाखे फोड़ने से बचें।
- सही कपड़े न पहनने पर भी पंडाल न जलाएं।
- पंडाल में कहीं भी तेल के दिये, अगरबत्ती, मोमबत्ती कभी नहीं छोड़ें।
निवेदक :- वरीय जिला समादेष्टा-सह-जिला अग्निशमन पदाधिकारी, सुपौल।
संपर्क सूत्र :- जिला समादेष्टा कार्यालय, सुपौल, अग्निशमन, सुपौल – 7485805851, 7485805850, अग्निशामकालय, बीरपुर – 7485805852, 7485805853, अग्निशामकालय, निर्मली – 7485805856, अग्निशामकालय, त्रिवेणीगंज – 7485805854, 7485805855
